दिल्ली धमाके : क्या अल फलाह यूनिवर्सिटी के प्रशासन को पता था धमाकों के बारे में डॉ उमर और डॉक्टर मुजम्मिल से बैक डेट में ले लिए थे रिजाइन हर रोज हो रहे नए खुलासे
दिल्ली धमाके : क्या अल फलाह यूनिवर्सिटी के प्रशासन को पता था धमाकों के बारे में डॉ उमर और डॉक्टर मुजम्मिल से बैक डेट में ले लिए थे रिजाइन हर रोज हो रहे नए खुलासे

हरियाणा के फरीदाबाद जिले के गांव धौज में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जो वर्तमान में आतंकवाद की फैक्ट्री बन चुकी है को लेकर के हर रोज नए बड़े खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में अब यह बड़ा खुलासा हुआ है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने संदिग्ध डॉक्टर जो वर्तमान में आंतकवाद की बड़ी कड़ी बन चुके हैं जिसमें डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर उमर शामिल है से बैक डेट में ही उनके रिजाइन ले लिए थे। इस खुलासे के बाद अब जांच एजेंसियां इस बात की भी तहकीकात कर रही है कि क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन को इन डॉक्टरों की हरकतों और इन द्वारा किए जाने वाले धमाकों के बारे में पता था।
अल-फलाह ने उमर और मुज्जमिल से बैक डेट में रिजाइन लिए
वहीं, जांच एजेंसियों ने फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा नया खुलासा किया है। उनके अनुसार यूनिवर्सिटी ने अपनी छवि बचाने के लिए आरोपी डॉक्टर उमर और डॉक्टर मुजम्मिल से बैक डेट में त्याग पत्र ले लिए थे। इस खुलासे के बाद एजेंसियों ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अन्य रिकॉर्ड के साथ छेड़खानी का शक भी यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर गहरा गया है। यूनिवर्सिटी के काफी रिकॉर्ड को कब्जे में ले लिया है और उसकी बारीकी से जांच की जा रही है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर भूपिंदर कौर आनंद ने मीडिया को लिखित बयान जारी किया।
संदिग्ध वाहनों की सूची बनी
जांच एजेंसियों ने पार्किंग क्षेत्र में प्रवेश करने वाले और आसपास दिखाई देने वाले प्रत्येक संदिग्ध वाहन की सूची तैयार की है। वाहनों की पंजीकरण संख्या के आधार पर उनके मालिकों और चालकों से पूछताछ की जा रही है। जब उमर ने कार पार्क की थी, उस समय आसपास कई गाड़ियां खड़ी थीं और कई वहां से गुजर रही थीं, सभी की जांच हो रही है। एजेंसियों को शक है कि संदिग्ध वाहनों में इनमे से कुछ लोग सवार हो सकते हैं। इनमें से ज्यादातर जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद के रहने वाले बताए जा रहे हैं। चूंकि इनके नाम फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ी डायरी और नोटबुक में दर्ज थे, इसलिए माना जा रहा है कि ये भी मॉड्यूल का हिस्सा रहे होंगे।
तीन किलोमीटर तक जांच
संदिग्ध वाहनों की पहचान और उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए धमाकास्थल से जुड़ी सड़कों का तीन किलोमीटर दायरे तक रूट मैपिंग की जा रही है। एजेंसियां 250 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज को बार-बार खंगाल रही हैं, ताकि पता चल सके कि फिदायीन उमर के अलावा और कौन लोग साजिश में शामिल थे।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर 2 FIR
इसी बीच, मामले में सामने आए ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ के खुलासे के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ दिल्ली में दो FIR दर्ज की गई हैं। पहली FIR विभिन्न नियमों के उल्लंघन से संबंधित है, जबकि दूसरी FIR यूनिवर्सिटी द्वारा गलत तरीके से मान्यता प्राप्त करने के मामले में दर्ज की गई है। जांच एजेंसियां अब उमर नबी के नेटवर्क, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से उसके संबंध और संभावित साजिश की अन्य कड़ियों की गहराई से जांच कर रही हैं।
जीजा साली कनैक्शन
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी डॉ. उमर ने हिदायत कॉलोनी में 10 दिनों के लिए एक कमरा किराये पर लिया था। यह मकान अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े एक इलेक्ट्रिशियन की साली का है और उसी के कहने पर डॉक्टर उमर को मकान किराये पर दिया गया था। सीसीटीवी में भी उमर की सफेद कार दिखाई दी है।मकान मालकिन के परिवार सहित गायब होने के चलते घर पर ताला लटका मिला। जांच एजेंसियां उसका डेटा खंगाल रही हैं। यूनिवर्सिटी के एक इलेक्ट्रिशियन की गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज हो गई है।